पटना: बिहार में खान सर और रौशन आनंद के बीच चल रहा विवाद अब केवल दो कोचिंग संस्थानों का मामला नहीं रह गया है। यह मुद्दा धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेता जा रहा है और इसका असर राज्य की सियासत पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके नेता तेजस्वी यादव के लिए यह मामला राजनीतिक संतुलन की परीक्षा बन गया है।
विवाद की शुरुआत पटना के दो प्रमुख कोचिंग संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव से हुई थी। बाद में हिंसा, तोड़फोड़ और गोलीबारी के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया। इसी बीच रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे प्रकरण को नई दिशा दे दी।
प्रिंस यादव की मौत के बाद तेजस्वी यादव ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी और जनता का भरोसा कायम रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला RJD के लिए संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि इसमें अलग-अलग सामाजिक समूहों की भावनाएं जुड़ गई हैं। खान सर की लोकप्रियता बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं के बीच है, जबकि रौशन आनंद और उनके परिवार के प्रति भी एक वर्ग में सहानुभूति देखी जा रही है। ऐसे में किसी एक पक्ष के समर्थन की स्पष्ट छवि पार्टी के लिए राजनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है।
तेजस्वी यादव ने अब तक सीधे किसी पक्ष का समर्थन करने के बजाय निष्पक्ष जांच की मांग पर जोर दिया है। इससे वे न्याय और पारदर्शिता की बात करते हुए दोनों पक्षों से समान दूरी बनाए रखने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
उधर, रौशन आनंद ने जेल से बाहर आने के बाद अपने भाई की मौत को साजिश करार देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि मामले की जांच एजेंसियां अभी तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं। दूसरी ओर खान सर से जुड़े विवाद और उनके समर्थकों की प्रतिक्रियाओं ने भी बहस को और तेज कर दिया है।
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उभरे इस विवाद ने शिक्षा जगत, सामाजिक समीकरणों और राजनीति को एक साथ जोड़ दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच की दिशा और राजनीतिक दलों की रणनीति पर सबकी नजर बनी रहेगी। फिलहाल तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक संतुलन बनाए रखें और किसी भी वर्ग को नाराज होने का मौका न दें।